About Sundrani



छत्तीसगढ़ के भीष्म पितामह एवं गुलशन कुमार के नाम से मशहूर मोहनचंद सुंदरानी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है । छत्तीसगढ़ के कलाकारों को खोज- खोजकर तराशना और आगे बढ़ाना उनके जीवन का मकसद है । वे कहते है कि छोटे- छोटे कलाकारों को आगे बढ़ाने में उन्हें एक सुखद अनुभूति का एहसास होता है । आज भी वे गांव - गांव, गली- गली में कलाकारों की तलाश में भटकते रहते है । मोहन सुंदरानी स्वर्गीय श्री मोटुमल सुंदरानी और माता स्वर्गीय मायादेवी सुंदरानी के सुपुत्र है । जिनका जन्म १५ जुलाई १९५० को आरवी जिला वर्धा महाराष्ट्र में हुआ और बचपन के बाद से अब तक उनका संपूर्ण कार्य क्षेत्र छत्तीसगढ़ की पावन धरा है । बी.कॉम की शिक्षा अर्जित कर अपने विभिन्न कार्यो व व्यवसायों के साथ-साथ अपनी गरीबी को परिश्रम से पीछे छोड़ते हुए वे लोक कला की दुनिया में प्रवेश कर अपनी कैसेट कंपनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की दबी छुपी प्रतिभा को सार्वजनिक करने का काम किया है । मोहन सुंदरानी ने अपनी प्रयासों से सदैव कला जगत को आलोकित किया । उन्होंने न सिर्फ नाचा गम्मत को उठाने का काम किया बल्कि उसमे अभिनय भी किया । मोहन सुंदरानी ने सदैव कला और आस्था से पूरी निष्पक्षता के साथ गीत संगीत भजनो का निर्माण भी किया है । इस कड़ी में उन्होंने 200 से अधिक सतनाम समाज के गुरुघासी दास बाबा के जीवन पर कथाएं, पंथी गीत बजनो और ऑडियो कैसेट का निर्माण किया है । जिससे सतनाम समाज के कलाकारों को प्रोत्साहन और मंच मिला । वही साहू समाज की पूजनीय संत माता कर्मा व राजिम माता के ऑडियो कैसेट का निर्माण कर उन्हें जन-जन तक पहुंचाया है । लुप्त कलाओ एवं लोक गाथाओ को लगातार कायम रखने के लिए मोहन सुंदरानी ने महत्वपूर्ण कार्य किये है । इन कलाओ के प्रचार प्रसार के लिए उन्होंने फिल्मो के माध्यम से दशय व संगीत की कल्पना कर इन कलाओं को स्थापित करने का प्रयास लगातार कर रहे है । 500 वर्ष पुरानी छत्तीसगढ़ी की लोक कथा लोरिक चंदा का निर्माण कर प्रचार प्रसार किया । पारम्परिक बिहाव गीत जो रीती रीवाजो पर आधारित है उनको वीडियो सीडी के माध्यम से जारी कर जन-जन तक पंहुचा रहे है । आदिवासी क्षेत्रों के लिए गौरा-गौरी, सुवा डंडा गीतों को वीडियो सीडी के रूप में निर्माण कर इन पारम्परिक कलाओं का प्रचार प्रसार कर रहे है ।

The famous Mohan Chand Sundarani, known as Bhishma Pitamah of Chhattisgarh and Gulshan Kumar, is not an acquaintance of any introduction today. Finding and carving Chhattisgarh artists is the motive of their lives. They say that they are feeling a pleasant feeling in pursuing small artists. Even today, he wanders in search of artists in village-village, gali-gali. Mohan Sundaranani is the son of late Motilal Sundarani and the late Maya Maydevi Sundarani. He was born on July 15, 1950 in RV District Wardha Maharashtra and since then his entire work area till now is the holy place of Chhattisgarh. By earning B.Com's education and leaving his poverty behind his various works and occupations, he has entered the world of folk art and has worked to make Chhattisgarh's hidden talent public through his cassette company. Mohan Sundarani, with his efforts, always highlighted the art world. He not only did the work of raising dancing but also acting in it. Mohan Sundarani has always constructed song music bhajano with absolute neutrality from art and faith. In this episode, he has created stories, fame songs, bajonos and audio cassettes on the life of Guruvasi Das Baba of more than 200 Satnam Samaj. As a result, the artists of Satnam society got encouragement and platform. The same person has created the audio cassette of Mother Karma and Rajim Mata of the Sahu Samaj, and has brought them to the masses. Mohan Sundarani has done important work to maintain the continued art and folk songs. In order to spread the propaganda of these artists, he is constantly trying to establish these art by imagining the music of decade and music through films. The 500-year-old Chhattisgarhi's folklore, Lorik Chanda, spread the publicity. The traditional Behava songs, which are based on Rita Rivaji, are being released to the public by issuing them through video CDs. For tribal areas Gaura-Gauri, Suva Danda is promoting these traditional art by producing songs as video CDs.



Honour Of Mohan Sundrani



  • ऐबलान फिल्म अवार्ड 2012 में छत्तीसगढ़ी फिल्म के भीष्मपितामह के सम्मान से सम्मानित
  • गिरौदपुरी मेला स्थल में सतनाम नाम से सम्मानित
  • अखिल भारतीय सतनाम समाज द्वारा कला रत्न से सम्मानित
  • मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के हाथो सम्मानित
  • जैन समाज द्वारा लोककला प्रोत्साहन सम्मान दिया गया
  • यातायात पुलिस रायपुर द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह में विशेष योगदान के लिए सम्मानित
  • सिंधु विकास मंच द्वारा समाज विभूति के लिए विशेष सम्मान
  • वत्ता मंच रायपुर द्वारा लोक कला के सरंक्षण हेतु सम्मान
  • बाल कलाकारों को प्रोत्साहित करने हेतु बाल कला पारस सम्मान
  • Abhlaan Film Award 2012 honored with BhishmaPitamah of Chhattisgarh Film
  • Awarded by Satnam in Giroudpuri fair venue
  • All India Satnam Samaj Awarded by Art Ratna
  • Chief Minister honored by Digvijay Singh
  • Jain Samaj gave folk art encouragement
  • Railway police honored for special contribution in Road Safety Week by Raipur
  • Special Honor for Sanskriti Vibhuti by Indus Development Forum
  • Respect for the protection of folk art by the Watta platform Raipur
  • Children Arts Paras Respect to Encourage Child Artists